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Saturday, November 13, 2021

जिले में दो - दो राज्य सभा सांसद फिर भी काम की तलाश में चला काफिला पलायन की ओर सबसे ज्यादा प्रभावित आदिवासी परिवार...



रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बहुल्य जिला मंडला में कोरोना काल की महामारी युग में प्रवासी मजदूर सैकड़ों की तादात में बसों में भरकर वापस लाए गए थे ! उस समय गणना के अनुसार जो आंकड़े सामने आए वह आश्चर्यजनक थे सरकारी आंकड़ों के रिकॉर्ड के मुताबिक सबसे ज्यादा आंकड़े मंडला जिले के ही थे आप अगर चाहो तो मंडला जिले को पलायन वाला जिला कह सकते हैं ! मंडला जिला आदिवासी बाहुल्य जनजातियों के जिले में माना जाता है ! अधिकतर यहां आदिवासी जनजाति के लोग रहते हैं जो कि सिर्फ कृषि पर ही निर्भर रहते हैं! कृषि कार्य करने के बाद से ही रोजगार के अभाव में मूलभूत आवश्यकताओं के लिए पलायन  रोजगार की तलाश, हो या शिक्षा का आधार स्तंभ, भारी तादाद में लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं जबकि सरकार की अनेकों योजनाएं ग्राम पंचायत स्तर पर चलाए जा रहे हैं कहीं महात्मा गांधी रोजगार गारंटी तो कहीं मेड बंधान तो कहीं सीसी रोड ग्रेवल रोड परंतु लोगों को विलंब भुगतान के चलते पलायन करने पर मजबूर होना पड़ता है ?

आज भी जंगल में रहने वाले आदिवासी परिवार अपने घर से निकल कर शहरों की ओर परिवार बाल बच्चों समेत पलायन कर रहे हैं ! गांव में अगर जाकर देखा जाए तो पूरा गांव सुनसान और वीरान लगता है !! घरों के दरवाजों में केवल ताला नजर आ रहा है।

     पलायन को रोकने के उपाय

आज देखा जाए तो कई बड़े सामाजिक संगठन समाज सुधार के कार्य में लगे हैं परंतु शोषित समाज के उत्थान के लिए कोई ठोस कदम आज तक नहीं उठाया गया कोई योजना अथवा नीतियों का निर्माण अभी तक नहीं हुआ यह समस्या विकट है अच्छी नीति और रोजगार की व्यवस्था निश्चित ही पलायन को रोक सकती है सिर्फ समाज के कल्याण हेतु दृढ़ इच्छाशक्ति अगर बनाई जाए और नेताओं की स्वार्थ मुक्त राजनीति हो तो निश्चित ही लोगों का पलायन रोका जा सकता है !

1/ मंडला जिले में बंजर भूमि एक अभिशाप है सहयोग कर आदिवासी भाई बहनों की कठिन मेहनत परिश्रम को आज सही दिशा देने की जरूरत है !

2/ आदिवासी क्षेत्र में वन उपज बढ़ाने के लिए वृक्षारोपण की जरूरत है वृक्षारोपण से रोजगार की संभावना मिलेगी और जंगल का निर्माण भी होगा उपज भूमि और जलसंधारण की क्षमता का विकास भी होगा !

3/आमदनी बढ़ाने के लिए अधिकांश वृक्ष जैसे लाख ,गोंद, हर्रा, बहेरा ,आंवला ,महुआ ,चार, चरोंजी,तेंदू, आदि वृक्षों का रोपण कर इनकी आमदनी बढ़ाई जा सकती है !

4/क्षेत्र में लकड़ी उद्योग, प्लाई उद्योग, लगाने से आदिवासियों के लिए अपार संभावनाएं खुल सकती हैं आदिवासी अपने बंजर भूमि में वृक्षारोपण कर वृक्ष लगाकर रोजगार पा सकते हैं !

5/मंडला जिले में बहुत बड़ा हिस्सा बंजर भूमि का है जिसका अधिकांश क्षेत्र आदिवासियों के पास है इनमें कोदो, कुटकी ,राई, सरसों, की उपज हेतु इन्हें प्रशिक्षित किया जाए ताकि उनके जीवन शैली में सुधार हो ?

6/आदिवासी क्षेत्र में शासकीय स्कूल में शिक्षा का स्तर गिरा हुआ है इसी कारण यहां मजदूर पैदा होते हैं जो कि मालिक नहीं बन सकते उन्हें अच्छी शिक्षा के साथ-साथ नशा मुक्त शिक्षा देने की आवश्यकता है !

7/मंडला जिले में सिर्फ आदिवासियों को सरकारी योजना नीतियों के नाम पर चाहे अभ्यारण हो या बसनिया बांध , टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के नाम पर विस्थापन ही मिला है ??

रेवांचल टाईम्स से कन्हैया धारवैया की रिपोर्ट

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